muhabbat men mat pooch kya chahta hooñ | मुहब्बत में मत पूछ क्या चाहता हूँ

  - 100rav

मुहब्बत में मत पूछ क्या चाहता हूँ
वफ़ाई के बदले वफ़ा चाहता हूँ

हाँ शादी की ख़्वाहिश है मेरी ये तुम सेे
कहाँ कुछ दिनों का मज़ा चाहता हूँ

पता है वो दिल अपना बहला रही है
मगर मैं वही बेवफ़ा चाहता हूँ

गला ही दबा दे कोई यार मेरा
मरज़ की यही बस शिफ़ा चाहता हूँ

कहीं पेड़ को चींटियाँ ही न खा लें
वो तूफ़ाँ में टूटे ख़ुदा चाहता हूँ

मेरी मौत पे तेरे मोती से आँसू
ज़ियादा नहीं बस ज़रा चाहता हूँ

तू अगले जनम में हाँ पहले ही मिलना
किसी रोज़ होना तेरा चाहता हूँ

  - 100rav

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