यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दोये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगेये जो चेहरे हैं यहाँ चाँद से चेहरे 'ताबिश'ये मिरा इश्क़ मुकम्मल नहीं होने देंगे— Abbas Tabish