"जुस्तजु"
निकला ख़ुशी की जुस्तजु में
देखा तो 'अज़ाबो में मिली
इक शह थी जो सुकून नाम की
देखा तो ख़राबो में मिली
बरसों से थी कोशिश जिस चेहरे
को भूल जाने की बहुत रोए जब इक
तस्वीर किताबों में मिली
क़सम ख़ुदा की ये ज़ख़्म मुझे किसी
तेघ से नहीं मिले ये तो प्यार की
निशानी है जो उस के दिए गुलाबों से मिली
और मेरे लिखने के फन को मेरी किस्मत ना कहना
ये तो अता है जो उस के झूठे वादों से मिली
— Prince















