
मुख़ालिफ़त करो बातिल की सुब्ह-ओ-शाम करो
सदा फ़ज़ा में ये गूँजी कि नेक काम करो
न सो ओ नींद यूँ ग़फ़लत की नौ जवानों उठो
ख़ुदा के वास्ते हक़ के लिए क़याम करो
— Shajar Abbas
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