jaan tum par nisaar hai hamdam | जान तुम पर निसार है हमदम

  - Shajar Abbas

जान तुम पर निसार है हमदम
था हमें तुम से प्यार है हमदम

लौट भी आओ अब ख़ुदा के लिए
दिल बड़ा बे क़रार है हमदम

मिरे सब राज़ तुझ पे वाज़े हैं
तू मिरा राज़दार है हमदम

तेरी मेरी जुदाई के ग़म में
ये जहाँ सोगवार है हमदम

मेरी बे नूर इन निगाहों को
बस तिरा इंतिज़ार है हमदम

याद कर के तुझे लहू रोना
अब मिरा रोज़गार है हमदम

आपकी इन नशीली आँखों का
हम पे अब तक ख़ुमार है हमदम

तुम चले आओ फ़ातिहा पढ़ने
देखो सूना मज़ार है हमदम

गुल हैं सारे तुम्हारी क़िस्मत में
मेरी क़िस्मत में ख़ार है हमदम

मत वफ़ा का सबूत दो हमको
आप पर एतिबार है हमदम

थक चुके हैं चलो वहाँ बैठें
वो शजर छाँव दार है हमदम

  - Shajar Abbas

Charagh Shayari

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