जो इल्म रखते नहीं हैं दुआ के बारे में
वो ख़ाक जानेंगे ज़ात-ए-ख़ुदा के बारे में
जवाँ जो राह-ए-मुहब्बत की सिम्त जाते हैं
उन्हें बताओ उसूल-ए-वफ़ा के बारे में
हुरूफ़ दामन-ए-काग़ज़ को चाक कर डालें
अगर में लिक्खूँ तुम्हारी जफ़ा के बारे में
हवा ये सोचती रहती है रात दिन आख़िर
चराग़ सोचते क्या हैं हवा के बारे में
शजर का हाल-ए-परेशाँ उसे दिखा देना
कोई जो पूछे कभी ग़म-ज़दा के बारे में
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