ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं हैकिसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं हैहमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम नेयक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है— Vashu Pandey