daaman bhigoye ashkon se palkon ko nam kare | दामन भिगोए अश्कों से पलकों को नम करे

  - Shajar Abbas

दामन भिगोए अश्कों से पलकों को नम करे
लाज़िम है उस पे मुझ से बिछड़ने का ग़म करे

हाकिम है सल्तनत का उसे इख़्तियार है
बोसा जबीं का ले या मिरा सर क़लम करे

उसने बिछड़ते वक़्त हमें दी थी ये दुआ
परवरदिगार आप पे रहम-ओ-करम करे

उस से कहो के मुझ पे घड़ी इम्तिहाँ की है
वो आ के मुझ पे सूरा-ए-यासीन दम करे

जैसे सितम तू 'इश्क़ में करता है रब करे
वैसे ही कोई 'इश्क़ में तुझ पर सितम करे

परवरदिगार तुझ से दुआ है सदा शजर
अपने क़बीले वालों का ऊँचा अलम करे

  - Shajar Abbas

Udasi Shayari

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