wujood 'ishq ka aise mita raha hai koii | वुजूद 'इश्क़ का ऐसे मिटा रहा है कोई

  - Shajar Abbas

वुजूद 'इश्क़ का ऐसे मिटा रहा है कोई
लहू से लिक्खे हुए ख़त जला रहा है कोई

है कोई रक़्स में मसरूफ़ बज़्म में तो कहीं
किसी की याद में आँसू बहा रहा है कोई

फ़िराक़-ए-यार में अफ़सुर्दा हाल में है मलाल
किसी के वास्ते ख़ुद को सजा रहा है कोई

ये सच है 'इश्क़ है दोनों को एक दूसरे से
किसी ने कर दिया ज़ाहिर छुपा रहा है कोई

कोई मकीन हैं महलों में शान से तो कहीं
हयात दश्त में अपनी बिता रहा है कोई

उदास हो गए सारे परिंद और शजर
ये लग रहा है कि बस्ती से जा रहा है कोई

  - Shajar Abbas

Aansoo Shayari

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