ख़िज़ाँ को आता है कैसे बहार कर लेनालहू के छींटो से काँटो को प्यार कर लेनावो जो भी कह रहा है सच ही कह रहा होगाहमारा काम है बस ऐतिबार कर लेना— Rehan Mirza