Rehan Mirza

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@Rehanmirza

Rehan Mirza shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rehan Mirza's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

था साथ उस के और मैं कितना उदास था सूखा वही दरख़्त जो दरिया के पास था — Rehan Mirza
शे'र कहने का सलीक़ा तो नहीं आता हमें हम तो बस दर्द को लफ़्ज़ों में पिरो देते हैं — Rehan Mirza
ज़िंदगी सब को ये एहसास करा देती है ख़ुद-कुशी करते हैं जो ख़ुद-कुशी क्यूँँ करते हैं — Rehan Mirza
एक ही शख़्स नहीं होता सदा दिल का सुकूँ एक करवट पे कभी नींद नहीं आ सकती — Rehan Mirza
वो लड़की चाहती है उड़ना अपनी मर्ज़ी से उसे पतंग नहीं इक परिंदा बनना है — Rehan Mirza

Ghazal

मैं पहले अपने घर के सारे दरवाज़े लगाता हूँ हवा की दस्तकों से रात भर फिर दिल लुभाता हूँ उधर से ख़ुद-कुशी आवाज़ देती है उदासी को इधर से कॉल जब ख़ुशियों के नंबर पर मिलाता हूँ कुछ ऐसे हादसे गुज़रे हैं जिन को याद रखने में मैं छोटी-छोटी बातों को भी अक्सर भूल जाता हूँ मेरी तुर्बत पे आ कर अब न हंगामा करो ऐसे ज़रा आराम से बैठो मैं तुम को सब बताता हूँ ये मेरी बेबसी का इस्तिआरा तो ज़रा देखो मैं जब कुछ कह नहीं पाता हूँ तो बस मुस्कराता हूँ मैं ही शाइ'र, मैं ही सा में', मैं ही हूँ सद्र-ए-महफ़िल भी अकेला बैठ कर मैं ख़ुद को ही ग़ज़लें सुनाता हूँ — Rehan Mirza
यक़ीं की छत से गिरता है ये गमला टूट जाता है फ़क़त इक झूठ कहने से भरोसा टूट जाता है तुम्हें दो दिन की यारी ख़त्म होने का बहुत दुख है यहाँ मज़बूत से मज़बूत रिश्ता टूट जाता है तुम्हारे मुँह से मीठी बात सुनने का जो आदी हो तुम्हारे तल्ख़ लहजे से वो कितना टूट जाता है जवाँ बेटे की मय्यत होती होगी किस क़दर भारी उसे जब बाप ढोता है तो काँधा टूट जाता है दुआएँ ख़ुद-कुशी से जाने किस की रोक लेती हैं लटकता हूँ मैं रस्सी से तो पँखा टूट जाता है लगाओ दिल मगर ये बात मेरी याद रखना तुम मुक़द्दर है यही शीशे का शीशा टूट जाता है — Rehan Mirza