ik dafa hi sahi honthon se laga le mujh ko | इक दफ़ा ही सही होंठों से लगा ले मुझ को

  - Rehan Mirza

इक दफ़ा ही सही होंठों से लगा ले मुझ को
काग़ज़ी फूल हूँ ख़ुशबू का बना ले मुझ को

इस से पहले कि ज़माने से मुहब्बत उट्ठे
है दुआ मेरी ख़ुदाया तू उठा ले मुझ को

मैं तेरी राह में पत्थर सा पड़ा रहता हूँ
तू हटाने की ही नीयत से उठा ले मुझ को

बात कर मुझ से कि रौशन हो तेरा दिल जानां
इक दिया हूँ मैं तू चाहे तो जला ले मुझ को

दर-हक़ीक़त था मेरा ज़हन गिरफ़्तार-ए-अना
सो खुले दर पे भी दिखने लगे ताले मुझ को

  - Rehan Mirza

Ibaadat Shayari

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