vo jo dikhne men gulaabon ki tarah hota haius ka lahjaa hi to khaaron ki tarah hota hai | वो जो दिखने में गुलाबों की तरह होता है

  - Rehan Mirza

वो जो दिखने में गुलाबों की तरह होता है
उस का लहजा ही तो ख़ारों की तरह होता है

जिन के कपड़ों पे लगे रहते हैं पैवन्द कई
उन का किरदार सितारों की तरह होता है

माँ का हँसना तो है जन्नत की ज़मानत लेकिन
माँ का ग़ुस्सा भी दुआओं की तरह होता है

हाथ जब प्यार से वो रखता है इन आँखों पर
तो अँधेरा भी उजालों की तरह होता है

नाम सुनते ही कमी दर्द में आ जाती है
आप का ज़िक्र दवाओं की तरह होता है

झूठ से जिस के भी होती हो हिफ़ाज़त सच की
ऐसा झूठा भी तो सच्चों की तरह होता है

  - Rehan Mirza

Rose Shayari

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