रो लेने से दिल कब हल्का होता है
दरिया तो हर हाल में दरिया होता है
हिज्र की शब में इतना गिर्या होता है
हर आशिक़ का अपना दरिया होता है
उसको उतनी इज़्ज़त मिलती है साहब
जिसके पास में जितना पैसा होता है
शुरू-शुरू में सब लेते हैं दिल से काम
रफ़्ता-रफ़्ता आदमी दुनिया होता है
बहुत बुरा होता है अच्छा होना भी
अच्छों का नुक़्सान ज़ियादा होता है
सब ग़म की किश्तें भरते मर जाते हैं
सबका ही ख़ुशियों का बीमा होता है
जितनी देर वो मुझ सेे बातें करती है
उतनी देर ही मेरा होना होता है
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