इस तरीक़े से सही अपना बना लेगा मुझे

तू अगर ख़ुद को गँवा दे तो कमा लेगा मुझे

एक ताले की कई चाबियाँ हैं पास उस के
वो किसी तरह से भी यार मना लेगा मुझ

उँगलियों से मैं किरन बन के निकल जाऊँगा
तू समझता है कि मुट्ठी में दबा लेगा मुझे

लाख मैं गाता रहूँ गीत अना के अपनी
वो मगर एक इशारे पे बुला लेगा मुझे

उस ने भी सब की तरह दाद ही दी शे'रों पर
मैं ने सोचा था कि सीने से लगा लेगा मुझे

— Rehan Mirza

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