apni baanho se kyun hataaun use | अपनी बाँहो से क्यूँ हटाऊँ उसे

  - Kafeel Rana

अपनी बाँहो से क्यूँ हटाऊँ उसे
सो रहा है तो क्यूँ जगाऊँ उसे

जो भी मिलता है उसका पूछता है
यार किस किस से मैं छुपाऊँ उसे

  - Kafeel Rana

Bhai Shayari

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    और ये बस भी दूर जाने लगी

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    Kafeel Rana
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    छू के देखना उसको क्या अजब नज़ारा है
    तीर आते रहते थे फूल किसने मारा है
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    Kafeel Rana
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    मेरा क्या है मुझको चलना पड़ता है
    Kafeel Rana
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    इतना प्यारा है कि डरना पड़ता है

    आँखें काली कर देता है उसका दुख
    सबको ये जुर्माना भरना पड़ता है
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    Kafeel Rana
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    रात दिन तेरे साथ कटते थे
    यार अब तुझसे बात से भी गए

    ये मोहब्बत भी किन दिनों मे हुई
    दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
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