ख़ूब-सूरत सी इक परी का ख़याल
है अँधेरे में रौशनी का ख़याल
जिस को मेरा कोई ख़याल नहीं
मुझ को हर वक़्त है उसी का ख़याल
है मेरी बाहों में कोई लेकिन
आ रहा है मुझे किसी का ख़याल
दिल मुलाक़ात में लगे कैसे
हर घड़ी उन को है घड़ी का ख़याल
बा'द में इश्क़ हो गया उन से
पहले आया था दोस्ती का ख़याल
देख कर आप का हसीं चेहरा
मुझ को आता है शा'इरी का ख़याल
— Rehan Mirza















