tere baghair bhi ham ne tujhi pe she'r kahe | तेरे बग़ैर भी हम ने तुझी पे शे'र कहे

  - Rehan Mirza

तेरे बग़ैर भी हम ने तुझी पे शे'र कहे
रहे अँधेरे में और रौशनी पे शे'र कहे

मुझे वो धमकियाँ देती है "मार डालूँगी"
दुबारा तुम ने अगर ख़ुदकुशी पे शे'र कहे

क़लम हमारा कभी झूठ लिख नहीं पाया
जो तीरगी थी तो फिर तीरगी पे शे'र कहे

हमारी फ़िक्र ने पानी में ज़ह्र देखा वहाँ
जहाँ पे आके सभी ने नदी पे शे'र कहे

उठाके हाथ उदासी ये बोली मैं भी हूँ
कभी जो मैंने ख़ुशी में ख़ुशी पे शे'र कहे

  - Rehan Mirza

Khushi Shayari

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