ham thak chuke the aap ke jhoothe jahaan men | हम थक चुके थे आप के झूठे जहान में

  - Rehan Mirza

हम थक चुके थे आप के झूठे जहान में
तो सो रहे हैं चैन से अपने मकान में

मुरझाए से जो रहते थे शादाब हो गए
तितली ने जाने क्या कहा फूलों के कान में

जूही, गुलाब, चम्पा, चमेली भी है मगर
रुतबा तुम्हारा ऊँचा है इस ख़ानदान में

कोई सुख़न-शनास इन्हें भी ख़रीद ले
कुछ शे'र टाँग रक्खे हैं अपनी दुकान में

अपने हसीं लबों से वो यूँँ बोलता है झूठ
जैसे कि ज़हर दे रहा हो मीठे पान में

लहजे में इन के वैसी महक आती ही नहीं
ये फूल लाख बोल लें तेरी ज़ुबान में

  - Rehan Mirza

Lab Shayari

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