ये कैसे सानहे अब पेश आने लग गए हैं
तेरे आग़ोश में हम छट-पटाने लग गए हैं
तेरे आग़ोश में हम छट-पटाने लग गए हैं
बहुत मुमकिन है कोई तीर हम को आ लगेगा
हम ऐसे लोग जो पंछी उड़ाने लग गए हैं
हमारे बिन भला तन्हाई घर में क्या ही करती
उसे भी साथ ही ऑफ़िस में लाने लग गए हैं
बदन पर याद की बारिश के छींटे पड़ गए थे
पराई धूप में उन को सुखाने लग गए हैं
हवा के एक ही झोंके में ये फल गिर पड़ेंगे
ये बूढे पेड़ के कंधे झुकाने लग गए हैं
नज़र के चौक पे बारिश झमाझम गिर रही है
तो दिल के रूम में गाने पुराने लग गए हैं
9
0 Likes
सोचता हूँ कि दिल-ए-ज़ार का मतलब क्या है
एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है
एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है
आप कहते हैं कि दीवार गिरा दी जाए
आप की नज़रों में दीवार का मतलब क्या है
आख़िरी फ़ैसला तुम अपने मुताबिक़ लोगे
फिर मेरी हामी या इनकार का मतलब क्या है
संग-दिल लोगों से क्या अपनी तबीअ'त कहते
किसी दीवार से गुफ़्तार का मतलब क्या है
उठ के जा सकते हैं हम ऐसों के साए से आप
हम समझते हैं कि अश्जार का मतलब क्या है
पहले पहले तो फ़क़त ज़ब्त के इम्कान रहे
रफ़्ता रफ़्ता खुला इज़हार का मतलब क्या है
मैं कि चुप ज़ात था सो शे'र कहा करता था
पूछ लेती थी वो अश'आर का मतलब क्या है
8
5 Likes
मैं तुझ से बात करने को तिरे किरदार में आ कर
इधर से फ़ोन करता हूँ उधर से बात करता हूँ
मैं तेरे साथ तो घर में बड़ा ख़ामोश रहता था
नहीं मौजूद तू घर में तो घर से बात करता हूँ
ख़िज़ाँ का कोई मंज़र मेरे अंदर रक़्स करता है
कभी जो बन में गुल से या समर से बात करता हूँ
सुख़न के फ़न को ऐसे ही तो ज़ाएअ'' कर नहीं सकता
सो मैं ख़ुद से या फिर अहल-ए-नज़र से बात करता हूँ
7
3 Likes
तुम मुहब्बत से नहीं मुझ से ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो
मुंतज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक़्शा भी बदल सकते हो
6
51 Likes
5
32 Likes
4
39 Likes
3
0 Likes
2
0 Likes










