इल्म जब होगा किधर जाना है
हाए तब तक तो गुज़र जाना है
हाए तब तक तो गुज़र जाना है
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पत्थर पहले ख़ुद को पत्थर करता है
उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है
उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है
एक ज़रा सी कश्ती ने ललकारा है
अब देखें क्या ढोंग समुंदर करता है
कान लगा कर मौसम की बातें सुनिए
क़ुदरत का सब हाल उजागर करता है
उस की बातों में रस कैसे पैदा हो
बात बहुत ही सोच-समझकर करता है
जिस को देखो 'दानिश' का दीवाना है
क्या वो कोई जादू-मंतर करता है
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हम अपने दुख को गाने लग गए हैं
मगर इस में ज़माने लग गए हैं
मगर इस में ज़माने लग गए हैं
किसी की तर्बियत का है करिश्मा
ये आँसू मुस्कुराने लग गए हैं
कहानी रुख़ बदलना चाहती है
नए किरदार आने लग गए हैं
ये हासिल है मिरी ख़ामोशियों का
कि पत्थर आज़माने लग गए हैं
ये मुमकिन है किसी दिन तुम भी आओ
परिंदे आने जाने लग गए हैं
जिन्हें हम मंज़िलों तक ले के आए
वही रस्ता बताने लग गए हैं
शराफ़त रंग दिखलाती है 'दानिश'
कई दुश्मन ठिकाने लग गए हैं
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इश्क़ कहता है भटकते रहिए
और तुम कहते हो घर जाना है
और तुम कहते हो घर जाना है
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