मुझ में है कुछ दर्द बचा सो ज़िंदा हूँ

चारा-गर ने बोल दिया सो ज़िंदा हूँ

मैं बस मरने ही वाला था फिर उस ने
होंटों पर इक लम्स रखा सो ज़िंदा हूँ

मुझ को एक फ़क़ीर ने सिक्के के बदले
दी होगी भरपूर दुआ सो ज़िंदा हूँ

सोचा था अब मौत सी नींद मैं सोऊँगा
ख़्वाब में कुछ नायाब दिखा सो ज़िंदा हूँ

जीना वो भी होश में रह के मुश्किल था
करता हूँ अब रोज़ नशा सो ज़िंदा हूँ

उस ने बोला याद मुझे तुम मत करना
मैं ने भी फिर मान लिया सो ज़िंदा हूँ

ख़्वाब में उस से रोज़ मिला करता था 'मीत'
लेकिन सच में नहीं मिला सो ज़िंदा हूँ

— Amit Sharma Meet

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Yaad Shayari

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