is miTTi ko aise khel khilaaya ham ne | इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने

  - Amit Sharma Meet

इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने
ख़ुद को रोज़ बिगाड़ा रोज़ बनाया हम ने

जो सोचा था वो तो हम से बना नहीं फिर
जो बन पाया उस से जी बहलाया हम ने

ग़म को फिर से तन्हाई के साथ में मिल कर
हँसते हँसते बातों में उलझाया हम ने

ना-मुम्किन था इस को हासिल करना फिर भी
पूरी शिद्दत से ये 'इश्क़ निभाया हम ने

उस की यादें बोझ न बन जाएँ साँसों पर
सो यादों से अपना दिल धड़काया हम ने

कह देते तो शायद अच्छे हो जाते पर
ख़ामोशी से अपना मरज़ बढ़ाया हम ने

उस का चेहरा देख लिया था एक दफ़ा फिर
इन आँखों से सालों क़र्ज़ चुकाया हम ने

  - Amit Sharma Meet

Doctor Shayari

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