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इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने
ख़ुद को रोज़ बिगाड़ा रोज़ बनाया हम ने
ख़ुद को रोज़ बिगाड़ा रोज़ बनाया हम ने
जो सोचा था वो तो हम से बना नहीं फिर
जो बन पाया उस से जी बहलाया हम ने
ग़म को फिर से तन्हाई के साथ में मिल कर
हँसते हँसते बातों में उलझाया हम ने
ना-मुम्किन था इस को हासिल करना फिर भी
पूरी शिद्दत से ये इश्क़ निभाया हम ने
उस की यादें बोझ न बन जाएँ साँसों पर
सो यादों से अपना दिल धड़काया हम ने
कह देते तो शायद अच्छे हो जाते पर
ख़ामोशी से अपना मरज़ बढ़ाया हम ने
उस का चेहरा देख लिया था एक दफ़ा फिर
इन आँखों से सालों क़र्ज़ चुकाया हम ने
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जिस्म को जीने की आज़ादी देती हैं
साँसें हर पल ही क़ुर्बानी देती हैं
साँसें हर पल ही क़ुर्बानी देती हैं
रातें सारी करवट में ही बीत रहीं
यादें भी कितनी बेचैनी देती हैं
जो राहें ख़ुद में ही बे-मंज़िल सी हों
ऐसी राहें नाकामी ही देती हैं
कैसे भी पर मुझ को कुछ सपने तो दें
आँखें क्या केवल बीनाई देती हैं
'मीत' मुझे अक्सर रातों में लगता है
रूहें मुझ को आवाज़ें सी देती हैं
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रात-भर ख़्वाब में जलना भी इक बीमारी है इश्क़ की आग से बचने में समझदारी है
वक़्त मिलता ही नहीं है मुझे तन्हाई से
जंग ख़ुद से ही मिरी आज तलक जारी है
आइने घर के सभी टूट चुके हैं कब के
रू-ब-रू ख़ुद से ही होना भी मुझे भारी है
मेरी ये बात तू माने या न माने लेकिन
बिन तिरे दुनिया में जीना भी अदाकारी है
दर्द तन्हाई तड़प अश्क मोहब्बत यारी
'मीत' इन सब में ही उस ग़म की तरफ़-दारी है
Read Fullजंग ख़ुद से ही मिरी आज तलक जारी है
आइने घर के सभी टूट चुके हैं कब के
रू-ब-रू ख़ुद से ही होना भी मुझे भारी है
मेरी ये बात तू माने या न माने लेकिन
बिन तिरे दुनिया में जीना भी अदाकारी है
दर्द तन्हाई तड़प अश्क मोहब्बत यारी
'मीत' इन सब में ही उस ग़म की तरफ़-दारी है
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तुझ को मा'लूम नहीं क्या है तिरी यादों से
एक अंजान सा रिश्ता है तिरी यादों से
एक अंजान सा रिश्ता है तिरी यादों से
रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत
दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से
हिज्र के ग़म ने मुझे मार दिया था तो क्या
मर के जीना भी तो सीखा है तिरी यादों से
आज फिर से जो हुआ क़ैद तो ये सोचूँ हूँ
कल ही सोचा था कि बचना है तिरी यादों से
ऐसे शामिल था मैं तुझ में कि बड़ी मुश्किल से
मैं ने अब ख़ुद को निकाला है तिरी यादों से
क्या बताएँ कि यहाँ कैसे गुज़ारी हम ने
अपनी हर साँस को सींचा है तिरी यादों से
'मीत' यादों ने भी कितना है सताया मुझ को
मिरा तकिया बड़ा भीगा है तिरी यादों से
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मुझ में है कुछ दर्द बचा सो ज़िंदा हूँ
चारा-गर ने बोल दिया सो ज़िंदा हूँ
चारा-गर ने बोल दिया सो ज़िंदा हूँ
मैं बस मरने ही वाला था फिर उस ने
होंटों पर इक लम्स रखा सो ज़िंदा हूँ
मुझ को एक फ़क़ीर ने सिक्के के बदले
दी होगी भरपूर दुआ सो ज़िंदा हूँ
सोचा था अब मौत सी नींद मैं सोऊँगा
ख़्वाब में कुछ नायाब दिखा सो ज़िंदा हूँ
जीना वो भी होश में रह के मुश्किल था
करता हूँ अब रोज़ नशा सो ज़िंदा हूँ
उस ने बोला याद मुझे तुम मत करना
मैं ने भी फिर मान लिया सो ज़िंदा हूँ
ख़्वाब में उस से रोज़ मिला करता था 'मीत'
लेकिन सच में नहीं मिला सो ज़िंदा हूँ
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ऐ ख़ुदा जिस्म में तू ने ये बनाया क्या है
दिल तो ये है ही नहीं फिर ये धड़कता क्या है
दिल तो ये है ही नहीं फिर ये धड़कता क्या है
इश्क़ की शाख़ पे आएगा चला जाता है
दिल के पंछी का भला ठोर-ठिकाना क्या है
हर नशा कर के यहाँ देख चुका हूँ यारों
भूल जाने का उसे और तरीक़ा क्या है
तेरी यादों में बहाए हैं जो आँसू इतने
आँख भी पूछ रही है कि बचाया क्या है
यूँ मुलाक़ात का ये दौर बनाए रखिए
मौत कब साथ निभा जाए भरोसा क्या है
हिज्र के बा'द ये सोचो कि कहाँ जाओगे
हम तो मर जाएँगे वैसे भी हमारा क्या है
'मीत' ख़्वाबों की ख़ुमारी से निकलने के बा'द
उस से इक बार तो पूछो कि बताता क्या है
Read Fullदिल के पंछी का भला ठोर-ठिकाना क्या है
हर नशा कर के यहाँ देख चुका हूँ यारों
भूल जाने का उसे और तरीक़ा क्या है
तेरी यादों में बहाए हैं जो आँसू इतने
आँख भी पूछ रही है कि बचाया क्या है
यूँ मुलाक़ात का ये दौर बनाए रखिए
मौत कब साथ निभा जाए भरोसा क्या है
हिज्र के बा'द ये सोचो कि कहाँ जाओगे
हम तो मर जाएँगे वैसे भी हमारा क्या है
'मीत' ख़्वाबों की ख़ुमारी से निकलने के बा'द
उस से इक बार तो पूछो कि बताता क्या है
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ख़त उस के जब आज जलाने बैठा तो
माचिस की तीली भी सीली निकली है
शोर-शराबा रहता था जिस आँगन में
आज वहाँ से बस ख़ामोशी निकली है
भूका बच्चा देखा तो इन आँखों से
आँसू की फिर एक नदी सी निकली है
अपनी सूरत की परतें जब खोलीं तो
अपनी सूरत उस के जैसी निकली है
मैं ने भी देखा है तेरी रहमत को
तूफ़ानों से बच के कश्ती निकली है
दिल टूटा तो 'मीत' समझ में ये आया इश्क़ वफ़ा सब एक पहेली निकली है
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ये ग़म फिर से उभरता जा रहा है
मुझे हैरान करता जा रहा है
मुझे हैरान करता जा रहा है
सुना मेआ'र गिरता जा रहा है
मगर बंदा निखरता जा रहा है
मुझे ये क्या हुआ है कुछ दिनों से
तिरा एहसास मरता जा रहा है
अमाँ इस ख़्वाब को भी क्या कहें अब
बिखरना था बिखरता जा रहा है
तिरा ख़ामोशियों को वक़्त देना
सदाओं को अखरता जा रहा है
हमीं ने ही उसे रस्ता दिया था
हमीं पे पाँव धरता जा रहा है
पुरानी देख कर तस्वीर तेरी
नया हर दिन गुज़रता जा रहा है
मैं जितनी और पीता जा रहा हूँ
नशा उतना उतरता जा रहा है
सुना है 'मीत' ख़्वाबों से निकल कर
वो आँखों में ठहरता जा रहा है
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