qismat apni aisi kacchi nikli hai | क़िस्मत अपनी ऐसी कच्ची निकली है

  - Amit Sharma Meet

क़िस्मत अपनी ऐसी कच्ची निकली है
हर महफ़िल से बस तन्हाई निकली है

ख़त उस के जब आज जलाने बैठा तो
माचिस की तीली भी सीली निकली है

शोर-शराबा रहता था जिस आँगन में
आज वहाँ से बस ख़ामोशी निकली है

भूका बच्चा देखा तो इन आँखों से
आँसू की फिर एक नदी सी निकली है

अपनी सूरत की परतें जब खोलीं तो
अपनी सूरत उस के जैसी निकली है

मैं ने भी देखा है तेरी रहमत को
तूफ़ानों से बच के कश्ती निकली है

दिल टूटा तो 'मीत' समझ में ये आया 'इश्क़ वफ़ा सब एक पहेली निकली है

  - Amit Sharma Meet

Wahshat Shayari

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