mar gaya hooñ main kisi ki dil-lagi men | मर गया हूँ मैं किसी की दिल-लगी में

  - Tiwari Jitendra

मर गया हूँ मैं किसी की दिल-लगी में
ख़ाक है बस जिस्म मेरी ज़िंदगी में

मैं रहा हूँ एक दरिया इक सदी में
दिल तड़पता है अभी भी तिश्नगी में

कुछ नहीं था यार उसके पास मैं था
आज सब कुछ है नहीं मैं ज़िंदगी में

मैं समझता था ख़ुदा उसको तभी तो
जी रहा था मैं उसी की बंदगी में

जीत तुमको है ज़माने सा बदलना
जी नहीं पाओगे इतनी सादगी में

  - Tiwari Jitendra

Bhai Shayari

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