हुस्न तो आइने बताते हैं
चाँद तारों के साथ आते हैं
दूर वाले तो दूर बैठे हैं
पास वाले अज़ाब लाते हैं
काम के पर नहीं बचे जिन के
वो परिंदे ही घर बनाते हैं
प्यार को खेल मान बैठे हैं
खेलते और भूल जाते हैं
आप जैसी है यार लड़की वो
हम जिसे दोस्त कह बुलाते हैं
— Tiwari Jitendra















