NISHKARSH AGGARWAL

NISHKARSH AGGARWAL

@nishkarshag392088

NISHKARSH AGGARWAL shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in NISHKARSH AGGARWAL's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

सुना है रात दिन रोते हो हैरत है
अभी तक तुम नहीं बदले हो हैरत है

कभी माँ को ख़ुदा समझा नहीं तुमने
सनम को तुम ख़ुदा कहते हो हैरत है

NISHKARSH AGGARWAL

वो सुन रहा है आज मेरी शायरी
तो आज मेरी शायरी की ईद है

वो देख लें भर के नज़र जिस शख़्स को
तो फिर समझ लो यार उसकी ईद है

NISHKARSH AGGARWAL

पहले रोते थे तो सो जाते थे
अब जो रोते हैं तो बस रोते हैं

NISHKARSH AGGARWAL

कल छत पे तुझे देख सनम चाँद यूँ बोला
ये किसने बनाया ज़मीं पे चेहरा हमारा

NISHKARSH AGGARWAL

जब ख़ुदकुशी न कर सका वो अपने दुख से तब
उसको किसी ने यार मिरा दुख बता दिया

NISHKARSH AGGARWAL

तेरी इन यादों की धीमी आँच पे,
रोज़ जलता है सनम ये दिल मिरा

NISHKARSH AGGARWAL

तेरी इन यादों की धीमी आँच पे
रोज़ जलता है सनम ये दिल मेरा

NISHKARSH AGGARWAL

उसे तो देख के जीने का मन करे दोस्त
वो कैसे लोग हैं जो उसको देख मरते हैं

NISHKARSH AGGARWAL

मैंने ख़ुद को बना लिया बेहतर
काश तुम मुझको अब मिली होती

NISHKARSH AGGARWAL

वो कह रहें हैं सब सहीं है देख तो
मैं कह रहा हूँ देख मुझ को छोड़ कर

NISHKARSH AGGARWAL

मुझे अब किसी से मुहब्बत न होगी
अगर हो भी जाए तो रग़बत न होगी

NISHKARSH AGGARWAL

ग़मज़दा रहने वो नहीं देता
ख़ुश यूँ मुझसे रहा नहीं जाता

NISHKARSH AGGARWAL

ख़ामोशी वो भी इतनी मेरे उसके दरमियाँ
इस दिल के टूटने की सदा आ गई उसे

NISHKARSH AGGARWAL

ढूंढ़ लेंगी ये नज़रें फिर तुमको
नज़रों से कब तलक बचोगे तुम

NISHKARSH AGGARWAL

अब वो भी देखे मेरे ही इंतिज़ार को बस
सो उसके दर पे रख आया मैं ये आँखें अपनी

NISHKARSH AGGARWAL

तुमसे बिछड़ के आई हमें ये सुख़नवरी
हमको तुम्हारी याद ने शायर बना दिया

पंछी मुझे कहीं तू अकेला न छोड़ दे
इस डर से मैंने यार तुझे ख़ुद उड़ा दिया

NISHKARSH AGGARWAL

गर रो रहा हूँ मैं तो कमज़ोर मत समझना
ये रोना है बनाता मज़बूत यार मुझको

NISHKARSH AGGARWAL

कैसे मैं आ जाऊँ ऐ यार तेरी सोहबत में
मैं ग़ुलाम बन के बैठा हूँ इस मोहब्बत में

NISHKARSH AGGARWAL

हुआ धूप का जब असर ज़िन्दगी पर
किताबों से तब मैंने साया लिया है

NISHKARSH AGGARWAL

रोज़ जाते हो तुम वक़्त को रोक कर
आज तुम ठहरों, इस वक़्त को जाने दो

NISHKARSH AGGARWAL

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