दर्द अपना किसी को बताते नहीं
ज़ख़्म अपने किसी को दिखाते नहीं
चाहता आप को सोचता हूँ मगर
फूल बावरों की टोली को भाते नहीं
चाँद को दूर से मैं निहारा किया
छत यही पास है वो बुलाते नहीं
अब पढ़ाई लिखाई से मन भर गया
ये रिलेशन समझ यार आते नहीं
कौन अच्छा यहाँ कौन बेकार है
साथ अपने कहीं भी निभाते नहीं
— Tiwari Jitendra















