kisi dil ke sahaare hain musaafir hain | किसी दिल के सहारे हैं मुसाफ़िर हैं

  - Tiwari Jitendra

किसी दिल के सहारे हैं मुसाफ़िर हैं
अगर राहों को प्यारे हैं मुसाफ़िर हैं

ख़ता ये थी मुझे झुकना नहीं आया
अना से दिन गुज़ारे हैं मुसाफ़िर हैं

मुझे लगने लगा था मैं अकेला हूँ
जहाँ में ख़ूब सारे हैं मुसाफ़िर हैं

यहाँ जितने हसीं चेहरे सताए हैं
हसीनों के ये मारे हैं मुसाफ़िर हैं

कभी सोचा नहीं था टूट जाएँगे
फ़लक पे लाख तारे हैं मुसाफ़िर हैं

बनाया जीत को हालात का मारा
उसी के हाथ हारे हैं मुसाफ़िर हैं

  - Tiwari Jitendra

Duniya Shayari

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