किसी दिल के सहारे हैं मुसाफ़िर हैं
अगर राहों को प्यारे हैं मुसाफ़िर हैं
ख़ता ये थी मुझे झुकना नहीं आया
अना से दिन गुज़ारे हैं मुसाफ़िर हैं
मुझे लगने लगा था मैं अकेला हूँ
जहाँ में ख़ूब सारे हैं मुसाफ़िर हैं
यहाँ जितने हसीं चेहरे सताए हैं
हसीनों के ये मारे हैं मुसाफ़िर हैं
कभी सोचा नहीं था टूट जाएँगे
फ़लक पे लाख तारे हैं मुसाफ़िर हैं
बनाया जीत को हालात का मारा
उसी के हाथ हारे हैं मुसाफ़िर हैं
— Tiwari Jitendra















