धूप तो छाँव छीन लेती है
जब नदी नाँव छीन लेती है
कोई जाता नहीं कमाने को
मुफ़्लिसी गाँव छीन लेती है
दोस्त अब सोच कर बनाना है
दोस्ती दाँव छीन लेती है
— Tiwari Jitendra
जब नदी नाँव छीन लेती है
कोई जाता नहीं कमाने को
मुफ़्लिसी गाँव छीन लेती है
दोस्त अब सोच कर बनाना है
दोस्ती दाँव छीन लेती है
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