जानते हो यार मुझ को क्या हुआ है
एक काँटा फूल से बिछड़ा हुआ है
दिन न जाने रात कैसे कट गई है
एक लड़का आज फिर तन्हा हुआ है
यार तुम थे पास मेरे प्रेम था बस
ज़िंदगी में बस यही अच्छा हुआ है
जीत तो बस नाम है मिलती नहीं है
खेल दिल था और दिल हारा हुआ है
मैं अकेला जी रहा हूँ लौट आओ
एक लड़का उम्र भर रोया हुआ है
— Tiwari Jitendra















