अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझेअगर जो जाना था तो क्यूँंँ मिले मुझेज़माना हो न हो रकी़ब बीच मेंतू अब कभी मिले तो यूँंँ मिले मुझे— Faiz Ahmad