राधा नईं तो श्याम नहीं है
कोई यहाँ पे राम नहीं है
उन से दुआ सलाम नहीं है
जिन से कोई काम नहीं है
ऐसा जीना भी क्या जीना
इक पल भी आराम नहीं है
लोगों की बातों का क्या है
उन को कोई काम नहीं है
उस के हाथों पर मेहंदी है
लेकिन मेरा नाम नहीं है
— Shadab Asghar















