
दवाई बन नहीं पाई अभी तक
पहेली है वो बीमारी अभी तक
कोई अब पूछने वाला नहीं है
ये रोटी क्यूँ नहीं खाई अभी तक
पिताजी कल ये कह के रो पड़े हैं
कुँवारी है बहन बड़की अभी तक
मुहब्बत कर ही लेता हूँ नई मैं
यही आदत नहीं छूटी अभी तक
ख़ुदा जाने मिरी मिस्टेक क्या है
वो लड़की मुझ से है रूठी अभी तक
— Shadab Asghar















