जी मेरी ज़िंदगी में कुई दुख नहीं
हाँ जी मैं ने कहा तो सखी दुख नहीं
जो भी अच्छा बुरा वो जो मैं ने किया
फिर किसी बात का भी कभी दुख नहीं
तो तुम्हें चाहिए थी ख़ुशी ही ख़ुशी
तो तुम्हें लग रहा आशिक़ी दुख नहीं
तू ने पूरी कहानी है देखी हुई
मरने वाले बता ज़िंदगी दुख नहीं
देखते हैं सभी उफ्फ वो तेरी हँसी
मैं तो होता नहीं. ये कोई दुख नहीं
हैं कई और दुख .......राह तकते तेरी
ये मुहब्बत का दुख आख़िरी दुख नहीं
कोई सुखः से रहे तो ये दुख है मेरा
मेरी फहरिस्त में तो कोई दुख नहीं
कुछ मेरे दुख तो हैं ख़ुद के पाले हुए
तो तुम्हें क्या लगा शा'इरी दुख नहीं
— Shadab Asghar















