hua jo aag to dil hi jala gaya ik shakhs | हुआ जो आग तो ,दिल ही जला गया इक शख़्स

  - Shadab Asghar

हुआ जो आग तो ,दिल ही जला गया इक शख़्स
बना जो आब तो, सब कुछ डुबा गया इक शख़्स

नज़र का शोख था, नज़रों को हमने तीर कहा
बना जो तीर तो, दिल में समा गया इक शख़्स

ये मेरा दुःख है कि मुझको वफ़ा की राहों में
अकेला छोड़ के चलता चला गया इक शख़्स

के उसके बाद कभी और कुछ दिखा ही नहीं
मेरी निगाह को कुछ ऐसा भा गया इक शख़्स

मैं जिस के दर पे भी जाऊँ जहाँ झुकाओ सर
मेरी तमाम दुआओ में आ गया इक शख़्स

बस एक बार उसे देख देखता ही रहा
यूँँ इक नज़र में ही अपना बना गया एक शख़्स

  - Shadab Asghar

Duniya Shayari

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