उनकी निगाह-ए-शोख़ की बरकत नहीं मिली
शहरत बहुत मिली है मुहब्बत नहीं मिली
हम को निकाल फेंका गया बे-दिली के साथ
हमको किसी के दिल में भी इज़्ज़त नहीं मिली
सब को कहाँ मिला है जहाँ में तमाम कुछ
दरवाजा मिल गया है मगर छत नहीं मिली
उस को मिला है वो जो उसे चाहिए न था
हम को मिला है ज़िस्म पर उल्फ़त नहीं मिली
'उम्रें गुज़र गईं तेरे दर पर खड़े-खड़े
कैसे जो दिल में आए इज़ाज़त नहीं मिली
हाथों में हाथ डाल के हम ताज़ देखते
लेकिन किसी भी हाथ की बैअत नहीं मिली
कुछ इसलिए भी शे'र सुनातें नहीं हैं जल्द
हम को हमारे शे'र की कीमत नहीं मिली
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