Chandan Sharma

Chandan Sharma

@Jaajib

Chandan Sharma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Chandan Sharma's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मैं नहीं चाहता हूँ आप सुख़न-फ़हमी हों दोस्त मैं नहीं चाहता हूँ आप को तन्हा करें आप — Chandan Sharma
मेरे अंदर हैं जाॅन रक़्स-कुनाँ ढूँढ़ते हैं जो फ़ारिहा मुझ में — Chandan Sharma
जाने वाले जा रहे हैं ज़िंदगी से देखता हूँ ये तमाशा बैठ कर मैं — Chandan Sharma
हाथ में तस्बीह लब पर नाम हर पल बस तेरा जानेमन यूँँ इश्क़ में मैं भी क़लंदर बन गया — Chandan Sharma
मत समझना किसी को राम यहाँ मन को तुम अपने सीता मत करना — Chandan Sharma
क्या पढ़ सकोगे तुम मेरी आँखों को जान अब लब मेरे बातें नहीं करते कभी — Chandan Sharma
मेरे दिल में तुझे खोने का गर जो डर नहीं होता मैं कुछ भी होता जानाना मगर शाइ'र नहीं होता — Chandan Sharma
ज़िंदगी खूब नाचे तेरे ताल पर अब सता मत मुझे जान घर जाने दे — Chandan Sharma
फ़क़त इक शख़्सियत को भूलने में कई लोगों से रिश्ते बन रहें हैं — Chandan Sharma
वो चाहती थी कि हो जाएँ हम तबाह कहीं हमारी चाह भी थी उस के ख़्वाब पूरे करें — Chandan Sharma
आप से बा'द बिछड़ने के खुला ये हम पे उम्र तन्हा ही गुज़र जाती, तो अच्छा होता — Chandan Sharma
मेरी नज़रों से ख़ुद को देखो तुम तुम हो क्या चीज़ जान जाओगी — Chandan Sharma
न ही आदम न पैगम्बर कोई याँ नहीं रहता मेरे अंदर कोई याँ — Chandan Sharma
हर दफ़ा वालिदा ने सँवारा मुझे टूट कर जब कभी मैं बिखर सा गया — Chandan Sharma

Ghazal

ख़ुदाया हो रहा तेरे नगर में क्या लगेगी आग बस मुफ़लिस के घर में क्या ख़ुदी का जिस्म ढ़ोना जब लगे मुश्किल रखें सामान आख़िर फिर सफ़र में क्या मुहब्बत है मुझे इन स्याह रातों से बसी है रातों में तू इस सहर में क्या मेरा क़ासिद भला मायूस क्यूँ है आज ख़बर आई नहीं उन की ख़बर में क्या जिधर देखे, उधर ही क़त्ल होते हैं न जाने है बला उस की नज़र में क्या जुदा होते हुए मर जाते तो अच्छा तेरे बिन भी बसर है, पर, बसर में क्या तपिश कैसी, धुआँ कैसा, हुआ क्या है कहीं कुछ जल रहा मेरे जिगर में क्या मुहब्बत दर-बदर ले जाएगी कब तक कटेगी उम्र सारी रहग़ुजर में क्या वफा़ कर के ख़सारा हो गया शायद निभा कर मैं मुहब्बत हूँ ज़रर में क्या ये नफ़रत ही दिखाई दे जो हर सू अब मुहब्बत मर गई है हम बशर में क्या कभी जंगल कभी सहरा फिरो 'जाज़िब' बने हो क़ैस तुम यूँँ बैठे घर में क्या — Chandan Sharma
हम से भी इश्क़ का कि इरादा करे कोई कर के ख़सारा मेरा मुनाफ़ा करे कोई कुछ वक़्त हम प भी कभी ज़ाया' करे कोई ग़म में हमारे ,हम को,हँसाया करे कोई पूरा हुजूम झूम रहा दिल महल्ले में ले नाम इश्क़ का कि तमाशा करे कोई कोई मुझे कभी भी दिखा ही नहीं मगर आवाज़ मुझ को दे के बुलाया करे कोई बरसों रहें ख़ुदी से हो कर दूर हम यहाँ हम से मिलाये हम को हमारा करे कोई वीरान दिल का शहर रहे जान कब तलक गर जाए कोई छोड़ तो आया करे कोई जब ज़िंदगी तबाह हो अपनी ,तबाह हम ऐसे में कैसे दिल ये लगाया करे कोई मेरे सुख़न ग़मों से लबालब भरे रहें अबकी सितम करे तो ज़ियादा करे कोई क्या क्या सितम हयात ने ढाहे पता नहीं क्यूँ ज़िंदगी से मौत तक़ाज़ा करे कोई मैं हूँ ज़मीं पसंद उसे कह दो बात ये हर शब फ़लक से मुझ को इशारा करे कोई लब काँपते, ज़बाँ ये मिरी तब फिसलती है गर सामने से ज़िक्र तुम्हारा करे कोई — Chandan Sharma
अभी तक मुसलसल इसी में रहा हूँ ये मत सोच तू, इश्क़ में, मैं नया हूँ तबाही लिए फिर रहा साथ अपने ज़रा दूर रह मुझ से मैं इक बला हूँ मुझे गुल मचाना है और ख़ामुशी से सो रस्मन मैं हर शे'र में चीखता हूँ मैं पहले जो भी था वो "मैं" था मगर जान मैं जो हूँ अभी आज "मैं", कौन, क्या हूँ मुझे नाज़ है इश्क़ पे आप के पर मैं अंजाम इस इश्क़ का जानता हूँ तुझे भूल जाने के ख़ातिर मैं अक़सर तुझे याद करता तुझे सोचता हूँ मैं भी आदमी था कभी पहले पर आज किसी की मुहब्बत में पत्थर हुआ हूँ लगाया है ऐसे डेरा ग़म ने मुझ में लगे है कि मैं ग़म के ख़ातिर बना हूँ तेरे हिज्र के जलते इस सहरा में मैं शब-ए-हिज्र से ही कहीं लापता हूँ तुम्हारी निगाहों में कुछ और है ये मुहब्बत को मैं खूब पहचानता हूँ कभी आ के सुलझा दे मुझ को तू 'जाज़िब' गया जब से है तू मैं उलझा पड़ा हूँ — Chandan Sharma
उस के कानों तक जब मेरी सदा गई होगी फिर तो आह मेरी जाँ को रुला गई होगी उस पे भी असर मेरे जाने का हुआ होगा अपने फ़ैसले पर वो बौखला गई होगी जाते-जाते पहलू से और क्या किया होगा वो तो है क़यामत आफ़त मचा गई होगी कर ली होगी, फिर उस शब, ख़ुद-कुशी मोहब्बत ने उस के कूचे से रो-रो कर वफ़ा गई होगी बा'द हिज्र के जीते जी वो मर गया होगा मरने से बहुत पहले मौत आ गई होगी होगा कोई और ही यारों अज़ीज अब उस को और किसी को अपने दिल में बसा गई होगी उस के नाम की हिचकी अब मुझे नहीं आती ज़ेहन से वो अपने मुझ को मिटा गई होगी बा'द मेरे वो मुझ को ढूँढ़ते हुए जाज़िब कू-ब-कू गई होगी जा-ब-जा गई होगी — Chandan Sharma
कर्ज़ सब को चुकाना पडता है ग़म में भी मुस्कुराना पड़ता है इश्क़ अंजाने में हो जाता है हम को कब दिल लगाना पडता है दिन मोहब्बत में बीत जाता है शब हवस में बिताना पडता है नींद कल तक हराम थी मेरी आज मुझ को जगाना पडता है रूह का रूह से मिलन है इश्क़ इश्क़ में जाँ से जाना पड़ता है कुछ नया करते रूह पर मरते जिस्म पर तो ज़माना पडता है मेरी हर बात टालने के लिए उस को बस इक बहाना पडता है आप ही रूठ जाते हैं सारे रब्त तन्हा निभाना पडता है दौर-ए-हाज़िर सुधारने के लिए दौर-ए-माज़ी भुलाना पड़ता है उस को मुझ पर यक़ीं नहीं "जाजिब" ज़ख़्म अपना दिखाना पड़ता है — Chandan Sharma
वली के लहू की रवानी ग़ज़ल है किसी नाज़नीं की जवानी ग़ज़ल है कई मिसरों के साथ वो रहने वाली कई मर्दों की इक ज़नानी ग़ज़ल है मोहब्बत, उक़ूबत, तिज़ारत शिकायत हक़ीक़त भी है और कहानी ग़ज़ल है है इक रब्त लफ़्ज़ों का लफ़्ज़ों से और क्या सलीक़े से जिस को निभानी ग़ज़ल है मुहब्बत में मिलते हैं जाने कई जख़्म उन्हीं ज़ख़्मों की इक निशानी ग़ज़ल है तिरा जिक़्र महफ़िल में छेड़ा था मैं ने सभी ने कहा क्या सुहानी ग़ज़ल है तिरे होठ मिसरे बदन बह्र है और तिरी ये निगाहें मआ'नी ग़ज़ल है वो जिस शहर में रहता है इश्क़ मेरा वहाँ की हवा और पानी ग़ज़ल है चुराया है जिस लड़की ने दिल मिरा वो बड़ी ख़ूब-सूरत सयानी ग़ज़ल है ज़बाँ कह नहीं सकती जो बातें "जाज़िब" उन्हें ख़ामुशी में बतानी ग़ज़ल है — Chandan Sharma

Nazm

"प्रेम कभी भी रोता नहीं है" प्रेम के पथ पर चलने वाले राहों में फूल खिलाते है प्रेम की माला जपते हैं और लोगों में प्रेम बढ़ाते हैं प्रेम डगर की कठीनाई से दिल वाले कब घबराते हैं जिस पर भी होता है मरना उस पर हंस कर मर जाते हैं जिस दिल में भी प्रेम भरा हो राह कभी वो खोता नहीं है प्रेम उदास हो सकता है पर प्रेम कभी भी रोता नहीं है किसी के प्रेम वियोग में यदि अश्रुओं को बहाएा तुम ने फिर तो तुम ये जानो "जाज़िब" अपना प्रेम गँवाया तुम ने प्रेम उपासक होते हुए प्रेम को ही रूलाया तुम ने प्रेम अमर है क्या भूल गए फिर क्यूँ शोक़ मनाया तुम ने तुम करते आए हो जो सब प्रेम में ऐसा होता नहीं है प्रेम उदास हो सकता है पर प्रेम कभी भी रोता नहीं है — Chandan Sharma