उल्फ़त के आड़े में तिजारत अब नहीं मुझ पर तुम्हारी ये हुकूमत अब नहींमेरे लिए है मेरी तन्हाई बहुतमुझ को किसी की भी ज़रूरत अब नहींहाँ अब तमन्ना तो नहीं है तेरी परकैसे को मैं कह दूँ मोहब्बत अब नहीं— Chandan Sharma