है निगाहों में बसा कोई ,कोई और दिल में है
देखना है ये कि आख़िर कौन मुस्तक़बिल में है
आँखों से आँखें लड़ा वो जाने क्या क्या कह गई
ख़ामुशी छाई ज़बाँ पर जान भी मुश्किल में है
मर के भी जीना उसी ने तो सिखाया है मुझे
जीते जी ही मार देने का हुनर क़ातिल में है
— Chandan Sharma















