कभी मिलता नहीं क्यूँ मुझ को मुझ मेंकहाँ है गर मेरे अंदर ख़ुदा हैभटकती है कहीं और ही मेरी रूहबदन मेरा कहीं और ही पड़ा है— Chandan Sharma