"प्रेम कभी भी रोता नहीं है"
प्रेम के पथ पर चलने वाले
राहों में फूल खिलाते है
प्रेम की माला जपते हैं और
लोगों में प्रेम बढ़ाते हैं
प्रेम डगर की कठीनाई से
दिल वाले कब घबराते हैं
जिस पर भी होता है मरना
उस पर हंस कर मर जाते हैं
जिस दिल में भी प्रेम भरा हो
राह कभी वो खोता नहीं है
प्रेम उदास हो सकता है पर
प्रेम कभी भी रोता नहीं है
किसी के प्रेम वियोग में यदि
अश्रुओं को बहाएा तुम ने
फिर तो तुम ये जानो "जाज़िब"
अपना प्रेम गँवाया तुम ने
प्रेम उपासक होते हुए
प्रेम को ही रूलाया तुम ने
प्रेम अमर है क्या भूल गए
फिर क्यूँ शोक़ मनाया तुम ने
तुम करते आए हो जो सब
प्रेम में ऐसा होता नहीं है
प्रेम उदास हो सकता है पर
प्रेम कभी भी रोता नहीं है















