Meaning of

शोक़

shok • شوق

इच्छा; जुनून; लालसा

desire; passion; longing

خواہش; جذبہ; آرزو

Arabic

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख — Allama Iqbal
तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं — Jaun Elia
शौक़ है इस दिल-ए-दरिंदा को आप के होंठ काट खाने का — Jaun Elia
उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते — Bashir Badr
तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है — Charagh Sharma
तुम इस का नुक़सान बताती अच्छी लगती हो वरना हम को शौक़ नहीं है सिगरेट-नोशी का — Khurram Afaq
कोई तो पूछे मोहब्बत के इन फ़रिश्तों से वफ़ा का शौक़ ये बिस्तर पे क्यूँ उतर आया — Harsh saxena
हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त हम तो हैं ढलते हुए हुस्न पे मरने वाले — Aks samastipuri
निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले — Aks samastipuri

शोक़ एक ऐसा शब्द है जो मानवीय भावनाओं की गहराई के साथ गूंजता है। यह लालसा और जुनून की जलती हुई तीव्रता का सार पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर आत्मा की उस चाहत को दर्शाता है जो पहुँच से परे है, एक ऐसी इच्छा जो दिल की आग को प्रज्वलित करती है।

कवि 'शोक़' का उपयोग प्रेम की तीव्रता और अधूरी इच्छाओं के दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर संतोष के विपरीत रखा जाता है, जो सपनों की बेचैन खोज को उजागर करता है।

शोक़ इच्छा और पूर्ति के बीच के अनंत नृत्य को समेटे हुए है, एक ऐसा विषय जो कविता के गलियारों में गूंजता है।