Meaning of

अमर

amar • فدا

अमर; शाश्वत

immortal; eternal

امر; ابدی

Sanskrit

अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था
अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है
उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है

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मैं तुझे बज़्म में लाऊँगा मेरी जान मगर
लोग जब दूसरे चेहरों पे फ़िदा हो जाएँ

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ऐसे हँस हँस के न देखा करो सब की जानिब
लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं

43

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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया

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रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया
इस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारो

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ज़माना तो फ़िदा है मुस्कुराहट पर हमारी
मगर दिल थक चुका है कसरत-ए-लब से बहुत अब

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ज़रा रूठ जाने पे इतनी ख़ुशामद
'क़मर' तुम बिगाड़ोगे आदत किसी की

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अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

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'अमर' शब्द कालातीतता और भौतिक क्षेत्र से परे जीवन के अतिक्रमण की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह अक्सर प्रेम, आत्मा या विरासत की अमरता का प्रतीक होता है।

कवि 'अमर' का उपयोग उस प्रेम की अवधारणा को व्यक्त करने के लिए करते हैं जो समय को चुनौती देता है। यह उन आदर्शों या स्मृतियों का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है जो वर्षों के बीतने से अप्रभावित रहते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'अमर' मानव आत्मा की स्थायी शक्ति का प्रमाण है।