प्यार की चुंदरी ओढ़ ली
दिल ने तो आग ही ओढ़ ली
थी कई बातें कहने को पर
होठ ने ख़ामोशी ओढ़ ली
ज़िंदगी जब सताने लगी
ये किया शा'इरी ओढ़ ली
है नई बात ये इनदिनों
ग़म ने संजीदगी ओढ़ ली
मरते मरते बचे बारहा
मौत ने ज़िंदगी ओढ़ ली
मुझ को आँसू छिपाने थे सो
मैं ने उस की हँसी ओढ़ ली
उस पे फिर रब भी मरने लगा
उस ने जब सादगी ओढ़ ली
— Chandan Sharma















