tujh se itnaa hi hai bas aas mujhe | तुझ से इतना ही है बस आस मुझे

  - Chandan Sharma

तुझ से इतना ही है बस आस मुझे
तू बना ले तेरा लिबास मुझे

मैं नहीं वो है जिस की आस तुम्हें
तुम नहीं वो जो आए रास मुझे

दरमियाँ अपने कोई रब्त नहीं
फिर भी तू है बहुत ही खास मुझे

उसकी ये ख़ामुशी उसे शायद
देखना हो कहीं उदास मुझे

मैं मुयस्सर तो था सभी को मगर
ना मिला कोई मेरे पास मुझे

मुझ को अच्छे से जानने वाले
कहते हैं एक ग़म-शनास मुझे

कर रहा मैं क्या जा रहा हूँ कहाँ
है नहीं कुछ होश-ओ-हवा से मुझे

आसमाँ से कहो कि प्यार भेजे
मैं ज़मीं हूँ लगी है प्यास मुझे

बाद पढ़ने के मुझ को समझे भी
चाहिए इक सुख़न-शनास मुझे

इक ज़रा शाद ने ली जाँ "जाज़िब"
ग़म नहीं कर सका खलास मुझे

  - Chandan Sharma

Ummeed Shayari

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