
लगाती है नमक ज़ख़्मों पे और फिर मुस्कुराती है
अरे ऐ ज़िन्दगी तू मौत से ज़्यादा सताती है
यहाँ हम हैं कि रोज़ाना करें हैं हँसने की कोशिश
यहाँ तू है कि रोज़ाना हमें आ कर रुलाती है
— Chandan Sharma
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