यूँँ जो ज़ुल्फ़ें सँवारती हो तुम
दिल में ख़ंजर उतारती हो तुम
चाहिए देखे आइना तुम को
आइना क्यूँ निहारती हो तुम
होश अपने खो बैठता हूँ मैं
प्यार से जब पुकारती हो तुम
— Chandan Sharma
दिल में ख़ंजर उतारती हो तुम
चाहिए देखे आइना तुम को
आइना क्यूँ निहारती हो तुम
होश अपने खो बैठता हूँ मैं
प्यार से जब पुकारती हो तुम
Other ghazal from the same pen
Shers of aaina shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling