क्या हो गर सागर का कोई साहिल नहीं हो
उम्र कटे बस चलने में और मंज़िल नहीं हो
उस को कोई कैसे समझाए क्या है इश्क़
जिस के सीने में इक पत्थर हो दिल नहीं हो
तर्क -ए-तअल्लुक करने को और क्या करती वो
उस ने कहा "चन्दन" तुम मेरे क़ाबिल नहीं हो
— Chandan Sharma
उम्र कटे बस चलने में और मंज़िल नहीं हो
उस को कोई कैसे समझाए क्या है इश्क़
जिस के सीने में इक पत्थर हो दिल नहीं हो
तर्क -ए-तअल्लुक करने को और क्या करती वो
उस ने कहा "चन्दन" तुम मेरे क़ाबिल नहीं हो
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